महिला साहित्यकार पर यौनसंबंध बनाने का दबाव देने के आरोप में फंसे कुलपति द्वारा...

सुशील मानव  महिला साहित्यकार के साथ अश्लील बातचीत करने और यौनसंबंध का दवाब बनाने के आरोप में घिरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतनलाल हंगलू द्वारा...

पुलिस रिपोर्ट में हिन्दी विश्वविद्यालय की दलित छात्राएं निर्दोष, विश्वविद्यालय प्रशासन हुआ शर्मसार!

सुशील मानव पिछले दिनों हिन्दी विश्वविद्यालय की पांच दलित शोधार्थियों/ विद्यार्थियों पर कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने  उन्हें निलंबित कर दिया था, जब उनपर एक...

ब्राह्मणवाद का प्रतीक है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

 अरविन्द गौड़ (यह आलेख समकालीन रंगमंच पत्रिका के ‘‘रंगकर्म और प्रशिक्षण‘‘ पर केन्द्रित नये अंक में प्रकाशित होने जा रहे मूल आलेख का एक अंश...

विश्वविद्यालय पढ़ायेगा इंद्रजाल, जादूगरी, प्रेत बाधा दूर करने की कला:संघ का एनजीओ दे रहा...

मनीषा   बीएचयू के बाद एक खबर यह भी: अभी 23 सितंबर की देर रात बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अपनी सुरक्षा की मांग के साथ शांतिपूर्ण...

एक सपने की मौत/अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शिक्षा संस्थानों में प्रतिभावान दलितों की आत्महत्या

सुधा अरोड़ा सुधा अरोड़ा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स ,...

वंचित तबकों की लड़कियों के भी खिलाफ है यह साजिश: जेएनयू प्रकरण

आरती रानी प्रजापति  रोहित वेमुला, जीशा, डेल्टा और न जाने कितने एकलव्य इस ब्राह्मणवादी भारत में मारे जा चुके हैं| इनका दोष इतना ही होता...

कंडोम- राष्ट्रवाद, जे एन यू और गार्गी का मस्तक

संजीव चंदन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महिलाओं की सदस्यता नहीं लेता है, स्पष्ट है कि उनके राष्ट्रवाद में महिलाओं की जगह नहीं है- हालांकि उनकी अनुसंगी...

पितृसत्ता पर सबसे पहला मुक्का ऑप्रेस्ड कम्युनिटी की महिलाओं ने मारा है: सोनपिम्प्ले राहुल...

जेएनयू छात्र संघ चुनाव में 'बापसा' (बिरसा-फूले-अम्बेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन) सोनपिम्प्ले राहुल पुनाराम के नेतृत्व में लीड लेता दिख रहा है. समाज के हाशिये से ...

क्यों कर रही हैं लडकियां पीएम मोदी का विरोध (!)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस दौरे के पूर्व बनारस के प्रशासनिक हलके में हड़कम्प मच गया जब बीएचयू की छात्राओं ने बीएचयू गेट के...

अश्लील बातचीत के आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत लेने से पुलिस ने की थी...

स्त्रीकाल डेस्क गया कॉलेज गया, मगध विश्वविद्यालय, बिहार के अंग्रेजी विभाग के एक प्रोफेसर, वकार अहमद ने पीजी में पढ़ने वाली एक छात्रा को प्रोजेक्ट...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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