‘आपहुदरी’: ‘अपने शर्तों पर जीने की आत्मकथा’

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com ‘आपहुदरी’ रमणिका गुप्ता की आत्मकथा की...

गिरह

स्साला सतीश पांडे को अब भी भाव मिलता है पार्टी में! मैंने तो उसी के कारण ही पार्टी को छोड़ा। धारा 370 का विरोध पांडे नहीं कोई दलित करे तो इसका मतलब बनता है। राजनीति भी बड़ी कमीनी हो गयी है। हम लाल झंडा ढोते रहते हैं और यह जानते हुए कि आजकल लाल और भगवा में बहुत अधिक फर्क नहीं रह गया है। कम से कम जाति के सवाल पर।

कल्याणी ठाकुर चरल: बंगाल का दलित स्वर

बंगला दलित साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कल्याणी ठाकुर चरल  के  जीवन  और  दलित  स्त्री  की  अस्मिता  को  मजबूती  से  स्थापित  करने  में  उनकी  भूमिका...

आशा पांडेय ओझा की कवितायें

आशा पांडेय ओझा मूलतः जोधपुर की रहने वाली आशा पांडेय की चार काव्य कृतियां प्रकाशित हैं. संपर्क : asha09.pandey@gmail.com 1. चीख स्त्री चीख क्यों हो मौन कौन...

हिन्दी आलोचना में स्त्री के प्रति संवेदना नहीं है: सविता सिंह

रेखा सेठी   हिंदी विभाग, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली वि वि, में एसोसिएट प्रोफेसर. विज्ञापन डॉट कॉम सहित आधा दर्जन से अधिक आलोचनात्मक और...

सांस्कृतिक पिछड़ापन और हाशिये से उभरती कविता

रविता कुमारी हिंदी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, उत्तराखण्ड ईमेल: ravita_kumari@yahoo.in भारत सम्मान का वह शब्द है जिसके आगे विश्व नतमस्तक होता है। इसकी कला, संस्कृति, दर्शन,...

स्त्री की चेतना और संसार का कहानी संग्रह है शरद सिंह की किताब ...

डॉ.जीतेंद्र प्रताप  कथाकार डॉ. शरद सिंह का कथा संग्रह तीली तीली आग मुझे जिन प्रमुख कारणों से आकर्षित और प्रभावित करता है,उन कारणों की संख्या...

वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (पहली क़िस्त)

उन लड़कों की बातों के तेवर से अशोक को यह आभास हो गया था कि आने वाला समय सुनीता के लिए बहुत अच्छा नहीं है। उसके साथ कुछ भी हो सकता है। और यदि वह इसी तरह सुनीता के साथ स्कूल जाता रहा तो वह भी चपेट में आए बिना नहीं रहेगा। कई दिन वह इस बात को लेकर परेशान रहा और सोचता रहा कि वह क्या करे और क्या नहीं करे।

क्योंकि वह स्त्री थी

डा .कौशल पंवार   युवा रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता ,  मोती लाल नेहरू कॉलेज , दिल्ली विश्वविद्यालय, में संस्कृत  की  असिस्टेंट प्रोफ़ेसर संपर्क : 9999439709 ऐसा तो...

जिंदगी की ओर लौटते हुए…

जयश्री रॉय जयश्री रॉय कथा साहित्य में एक मह्त्वपूर्ण नाम हैं. चार  कहानी संग्रह , तीन उपन्यास और एक कविता संग्रह प्रकाशित हैं ....
249FollowersFollow
642SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
Loading...