आम्रपाली ( रेनू यादव की कविताएं)

मस्तक गिरवी पैर पंगू छटपटाता धड़ हवा में त्रिशंकू भी क्या लटके होंगें इसी तरह शून्य में ? रक्तीले बेबस आँखों से क्या देखते होंगे इसी तरह दो कदम रखने खातिर

प्रतिमा की कविताएँ ( कहाँ हो विधाता ! और अन्य)

प्रतिमा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कवितायेँ प्रकाशित. संपर्क : rjpratima@gmail.com सेनाएँ कभी नहीं जाती सेनाएँ हड़ताल पर बेमौत मरने के खिलाफ नहीं उठाती आवाज़ कभी न जाने क्यों ? बुद्ध की असंख्य मूर्तियाँ नहीं बिछा देती...

सुल्ताना का सपना

रुकैया सखावत हुसैन  अंग्रेजी से अनुवाद : संज्ञा उपाध्याय ( पिछले 9 दिसंबर को हमने रुकैया सखावत हुसैन की रचना ' अबरोध बासिनी' का अनुवाद प्रकाशित...

जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताएँ

जितेन्द्र श्रीवास्तव  चर्चित कवि, संपादक: उम्मीद, कविता और आलोचना की कई किताबें प्रकाशित, इग्नू के  हिन्दी विभाग में प्रोफ़ेसर . संपर्क :09818913798 नमक हराम आँखों के जल...

भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है

आँचल  अंग्रेजी साहित्य की शोधार्थी आंचल भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से किये जाने को भिखारी ठाकुर का  अपमान बता रही हैं. इस टिप्पणी के अनुसार...

मनुस्मृति दहन के आधार : डा आम्बेडकर

( 25 दिसंबर को  ' मनुस्मृति दहन दिवस'  के रूप में भी मनाया जाता है , जिसे स्त्रीवादियों का एक समूह ' भारतीय महिला...

कंफर्ट जोन के बाहर

सपना सिंह प्रतिष्ठित पत्र -पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित .  संपर्क : sapnasingh21june@gmail.com वह गुस्से में थी! बहुत-बहुत ज्यादा गुस्से में। ‘‘साले, हरामी, कुत्ते ................’’ उसके मुंह से धाराप्रवाह...

सम्मान से नवाजे गए जमीन से जुड़े लेखक

साहित्य अकादेमी के सभागार में आज, 31 मार्च 2018 को ‘रमणिका फाउंडेशन सम्मान 7’ का आयोजन हुआ. ‘रमणिका फाउंडेशन सम्मान 7’ के अंतर्गत दो...

सरला माहेश्वरी की कविताएँ

सरला माहेश्वरी पूर्व सांसद सरला माहेश्वरी की प्रकाशित पुस्तकें - 'नारी प्रश्न', 'समान नागरिक संहिता', 'भगत सिंह', 'अग्निबीज डिरोजियो', 'हवाला कांड', 'शेयर...

उदय प्रकाश की कवितायें

उदय  प्रकाश उदय प्रकाश अपनी भाषा में लिखते हुए दुनिया के बडे लेखकों में शुमार हैं . इनसे उनके मोबाइल न 9810711981 पर सम्पर्क...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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