मध्यवर्गीय कामकाजी स्त्रियों के कशमकश भरी जिंदगी की कविताएं !

विनीता परमार की कवितायेँ आधुनिक कामकाजी महिलाओं की परिस्थितियों को, रोज -रोज की उनकी समस्याओं को बहुत बारीकी और तीक्ष्णता के साथ अपनी कविताओं के माध्यम से उठाती हैं. पर्यावरण विषय से पीएचडी कवयित्री ने अपनी इन कविताओं में भले ही प्रकृति का वर्णन नहीं दिखत पर सूक्ष्म रूप में यह आधुनिक जीवन की खोखली और फीकी चकाचौंध और उसमे कामकाजी स्त्रियों के बनावटी मुस्कान की मज़बूरी का बेहद सशक्त चित्र उभारती है.

सोजर्नर ट्रूथ: साहस और विवेक की मूर्ति

विजय शर्मा अनुवादक और आलोचक विजय शर्मा की पांचवी किताब 'अफ्रो-अमरीकन साहित्य : स्त्री स्वर' हाल में प्रकाशित हुई है . संपर्क :vijshain@gmail.com ....

काश ! ऐसी पत्नियाँ, बहनें समाज का अधिकतम सच हो जायें!

ज्योति प्रसाद क्या आपको मदर इण्डिया फिल्म का अंतिम दृश्य याद है? क्या आपको राधा, जिसका किरदार हिंदी सिनेमा की अदाकारा नरगिस ने निभाया था,...

शराबबंदी , महिला मतदाता और नीतीश कुमार

संजीव चंदन नीतीश कुमार की नई सरकार के द्वारा शराबबंदी को महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है. राज्य और राज्य से बाहर की महिलायें...

स्त्री विमर्शकार मीरा

नितिका गुप्ता नितिका गुप्ता डा. बाबा साहब आम्बेडकर विश्वविद्यालय , दिल्ली से शोध कर रही हैं.   संपर्क : nitika.gup85@gmail.com . हिन्दी साहित्य के...

यौन उत्पीड़न के शिकार वे सब: वे कोई भी हैं, वे जिन्हें हम जानते...

अपने यौन उत्पीड़न के बारे में #MeToo हैश टैग के साथ बताने का सिलसिला ट्वीटर से शुरू होकर फेसबुक पर जारी है. सोशल मीडिया...

स्त्री जागृति की पहली मशाल : सावित्रीबाई फुले

सुधा अरोड़ा सुधा अरोड़ा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स ,...

स्त्री के रंगों की दुनिया

परिमला अंबेकर कलाकारों की कल्पना में कैद स्त्री, कलाकारों के सौन्दर्यबोध की कसौटी स्त्री, कलाकारों के रंगों के लिए कैनवास पर वस्तू बनकर बिखरती स्त्री,...

अपने बच्चों को दूर रखे मर्दानगी की पाठशाला से

इमारतों में बनी पाठशालाएं, जहां हमने अक्षर ज्ञान की शुरुआत की और दुनिया भर का ज्ञान ग्रहण किया। जहां अध्यापकों ने परीक्षाओं का डर...

आख़िर हम भी तो इंसान ही हैं, हमें भी दर्द होता है : रवीना...

( थर्ड जेंडर, ट्रांस जेंडर, तृतीय लिंग, किन्नर आदि नामों से जाना जाने वाला यह समुदाय भारतीय समाज के सबसे उपेक्षित तबकों में से...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।