वंचित तबकों की लड़कियों के भी खिलाफ है यह साजिश: जेएनयू प्रकरण

आरती रानी प्रजापति  रोहित वेमुला, जीशा, डेल्टा और न जाने कितने एकलव्य इस ब्राह्मणवादी भारत में मारे जा चुके हैं| इनका दोष इतना ही होता...

“ये निंदा प्रस्ताव नहीं है”

सुशील मानव  हम जागरण संवादी में शामिल साहित्यकारों की निंदा नहीं कर रहे.. मरे हुए को और क्या मारना।  वे पहले ही बहुत कुछ मर-मारकर...

संघ प्रमुख की सुरक्षा पर हंगामा , आगे आये दलित संगठन

संजीव चंदन  पिछले दिनों नागपुर में मोहन भागवत को लेकर हंगामा खडा हो गया, जब नागपुर महानगरपालिका ने शहर के ऊंटखाना इलाके के डा. बाबासाहब...

क्या सच में गिरफ्तार होगा भाजपा समर्थक पिंटो परिवार: रायन स्कूल मर्डर केस

गुडगाँव के रायन स्कूल में 7 साल के बच्चे की ह्त्या के मामले में पूछताछ के लिए हरियाणा पुलिस मुम्बई पहुँच चुकी है. इतने...

शराबबंदी , महिला मतदाता और नीतीश कुमार

संजीव चंदन नीतीश कुमार की नई सरकार के द्वारा शराबबंदी को महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है. राज्य और राज्य से बाहर की महिलायें...

मैंने अमित शाह को गुंडा (इसलिए) कहा…..राना अय्यूब

मुकुल सरल   “ये किताब एंटी मोदी या एंटी अमित शाह नहीं है, ये किताब उन लोगों के लिए जस्टिस की किताब है। हम आपको सिर्फ...

बीएचयू: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही लड़कियों को देर रात योगी-मोदी-त्रिपाठी की पुलिस ने घेर...

बनारस से, कलंकित बीएचयू से  क्या लिखूं? लिखूं कि पत्नी को छोड़कर आया शासक नहीं जानता बेटियों से स्नेह-राग. माँ से ममत्व का नाटक करने...

‘ग्लोबल बहुजन एवार्ड’से सम्मानित हुईं मनीषा बांगर

स्त्रीकाल डेस्क  बामसेफ की उपाध्यक्ष मनीषा बांगर न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर के बहुजनों के बीच बहुजन-क्रान्ति का बिगुल बजा रही हैं.  पिछले...

नीतीश सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन 30 जुलाई को

स्त्रीकाल डेस्क  मुजफ्फरपुर बालिका-संरक्षण गृह में बच्चियों से बलात्कार के मामले में यद्यपि राज्यसरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है, लेकिन सरकार के...

वीरबालकवाद: हिन्दी साहित्य के भीतर क्रांतिधर्मिता को समझने के लिए जरूर पढ़ें यह व्यंग्यलेख

मनोहर श्याम जोशी  मनोहर श्याम जोशी के इस व्यंग्य लेख के मुख्य आधार रहे हैं अब बुजुर्ग वीरबालक रामशरणजोशी. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।