बिहार- सियासत और लेनिनग्राद का मिथ

जैसे ही पता चला कि महागठबंधन में उनको जगह नहीं मिली, भाकपा तथा अन्य वामपंथियों के रंगरूटों ने मीडिया पोर्टल, सोशल मीडिया, तथा कई यू-ट्यूब चैनलों पर लालू प्रसाद तथा राजद के खिलाफ लिखने लगे। अब राजद फिर से घोर जातिवादी हो गयी। लालू प्रसाद तथा उनके पूरे परिवार को तथाकथित चारा चोर और भ्रष्टाचारी के विशेषणों से नवाजा जाने लगा।

एक बहुजन नेत्री की संभावनाएं : मनीषा बांगर

इर्शादुल हक़ मायावती को कांशी राम ने अवसर दिया तो उन्होंने अपनी लीडरशिप साबित करके दिखाई. वह...

मध्यवर्गीय जीवन से संसद की यात्रा तक: भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री रीता वर्मा

राजनीति के क्षेत्र में आने के बाद कई तरह के विचार मुझे कौंधते रहे। संसद का समाजशास्त्र क्या है, संसद में, सेंट्रल कक्ष में समितियों में और गलियारों में। क्या पुरुष महिला सांसदों को महिला के रूप में ही देखते हैं या सांसद के तौर पर। प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। सार्वजनिक जीवन पुरुषों की दुनिया है, इसके साथ हमें विवाह करना होता है। एक पारदर्शी स्पेस और संसदीय एजेण्डे में समान भागीदारी आज की एक चुनौती है।

संसद के वे दिन: जब मैं झांसी से चुनकर आयी

एस्टीमेट कमेटी और पब्लिक अकाउन्ट कमिटी, यह दो महत्वपूर्ण सांसदीय समितियां थीं जो अध्यक्ष सदस्यों के सरकारी व्ययों पर देखरेख करने का अधिकार देती थीं। उन दिनों में कोई भी व्यक्ति गलत सूचना देने का ख्वाब भी नहीं देख पाता था। समिति के दौरे बहुत ही शैक्षणिक होते थे। हम राजस्थान के दौरे पर गए थे। हम ट्रेन में ही रहे जो हमें जगह-जगह ले जाती थी हमारा खाने-सोने की व्यवस्था सभी ट्रेन में ही थी। यह यात्रा काफी मजेदार रही।

पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े है: महाराष्ट्र महिला कांग्रेस अध्यक्ष

जब मैंने राजनीति की शुरुआत की, मैं कॉलेज से पढ़ कर निकली ही थी। मुझे इसका अनुभव बिल्कुल भी नहीं था। मेरी राजनीति की शुरुआत 1992 में जिला परिषद के चुनाव से जिला परिषद के अध्यक्ष के रूप में हुई। 5 साल तक मैं जिला परिषद में थी उसके बाद पार्टी में कई पदों पर रही।

जाने क्या कुछ है महिलाओं के लिए कांग्रेस के पिटारे में: कांग्रेस का घोषणापत्र

समाज के श्रमशील वर्ग की महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा है जिसमे प्रवासी महिला श्रमिकों के लिए पर्याप्त रैन बसेरों, कसबों और शहरों में महिलाओं के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की संख्या बढ़ाने, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों में सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीने लगाने की बात है.
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