पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े है: महाराष्ट्र महिला कांग्रेस अध्यक्ष

जब मैंने राजनीति की शुरुआत की, मैं कॉलेज से पढ़ कर निकली ही थी। मुझे इसका अनुभव बिल्कुल भी नहीं था। मेरी राजनीति की शुरुआत 1992 में जिला परिषद के चुनाव से जिला परिषद के अध्यक्ष के रूप में हुई। 5 साल तक मैं जिला परिषद में थी उसके बाद पार्टी में कई पदों पर रही।

प्यार के परदे में कैद आज़ादी

विद्याभूषण रावत यथार्थ की घटनाओं पर आधारित विद्याभूषण रावत की यह कहानी समाज में जेंडर और जाति...

अफसोस कि औरतें उठ तो रही हैं पर मर्दवादी संस्थाएं उन्हे कुचल देना...

पर अफसोस कि ये मार्च भी देश भर की लोकतांत्रिक संस्थाओं में भर दी गयी महिला विरोध की भावना की भेंट चढ़ गया. मुख्यधारा मीडिया में इस मार्च कि चर्चा आज न के बराबर दिख रही है. खासकर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जो आम लोगों के बीच अभी सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं वे लगातार सत्ता के खिलाफ जारी राजनीतिक सामाजिक बदलाव को खारिज करने या आम लोगों के बीच न पहुंचने देने में एक षड़यंत्रकारी भूमिका निभा रहे हैं.

कन्हैया कुमार सेक्सिस्ट और जातिवादी हैं (!)

यह भी अनायास नहीं है कि बहुत लोगों के कथित ‘उम्मीद’ और युवा ‘नायक’ की महिला पत्रकार पर यह सेक्सिस्ट टिप्पणी कोई मुद्दा नहीं है. वरना सोचिए, शरद यादव की टिप्पणियों पर कितना हंगामा हुआ था. यहां तक कि लेफ्ट की वृंदा करात तक ने शरद यादव पर हमला बोलती रही हैं, उन्हें माफी मांगने कहती रही हैं और एनडीटीवी में ‘शरद यादव, माइंड योर लैंगुएज’ जैसे कॉलम लिखती रही हैं. तो क्या युवा उम्मीद को कोई कहेगा कि कन्हैया, माइंड योर लैंगुएज!

‘मुख्यमंत्री, मंत्री और जो राष्ट्रपति हुए सबने किया यौन-शोषण, राजनीति में अस्मिता-हीन औरत की...

‘‘जाओ ये पत्र लेकर राजा बाबू से मिलो, वे तुम्हें बी.पी.सी.सी का सदस्य मनोनीत कर देंगे। तुम कांग्रेस पार्टी का काम करो। मेरा मन तो तुमने जीत ही लिया है।’’ यह कहते हुए उन्होंने मुझे आगोश में लेकर चूम लिया। शायद मैं सपना देख रही थी।

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