निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर

नीरज कुमार निराला का ब्याह तेरह (13) बरस की उम्र के आस-पास हो गया था। तकरीबन सोलह (16) बरस की उम्र में उनका गौना हुआ।...

देश के मर्दों एक होओ

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

नागार्जुन के उपन्यासों में स्त्री

श्याम लाल गौड़ प्राध्यापक,श्री जगदेव सिंह संस्कृत महाविद्यालय,सप्त ऋषि आश्रम हरिद्वार. उपन्यासकार नागार्जुन बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य सर्जन में लगाया।...

भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है

आँचल  अंग्रेजी साहित्य की शोधार्थी आंचल भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से किये जाने को भिखारी ठाकुर का  अपमान बता रही हैं. इस टिप्पणी के अनुसार...

मर्दोत्सव और स्त्रीविलाप बीच होलिका का लोकमिथ

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन तथा एक्टिविज्म. सम्पर्क: susheel.manav@gmail.com फोन- 6393491351 अवध वह क्षेत्र है जहाँ से राम की कट्टर मर्यादा पुरुषोत्तम छवि के साथ साथ...

डॉ. अंबेडकर का स्त्रीवाद (एक विश्लेषणात्मक पुनरावलोकन )

अमोल निमसडकर शोधार्थी,टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई . संपर्क : amolnimsadkar@gmail.com,मो.7028385569 स्त्री सशक्तिकरण के प्राचीन दस्तावेजों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि  इसकी शुरुआत...

रीतिकाल में स्त्रीं-यौनिकता का सवाल उर्फ देह अपनी बाकी उनका

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. भारतीय संदर्भों...

हिंदी साहित्य में आदिवासी स्त्री का सवाल

अ‍जय कुमार यादव पीएच.डी. हिंदी (शोधरत ) जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली संपर्कःajjujnu@gmail.com जब आदिवासी समाज में स्त्रियों की बात होती है तो ऐसा माना जाता...

विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?

सुशील शर्मा  लड़कियों  भावनात्मक रूप से लड़कों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होती हैं ,किन्तु वे आधुनिक तकनीकी एवं विज्ञान के विषयों की अपेक्षा परम्परागत विषयों...

देह का स्त्रीवादी पाठ और मित्रो मरजानी

शशिकला त्रिपाठी  विभागाध्यक्ष , हिन्दी,वसंता कॉलेज, बनारस. उत्तरशती के उपन्यासों में स्त्री सहित कई आलोचना पुस्तक प्रकाशित shashivcr9936@gmail.com किसी वरिष्ठतम रचनाकर की उस कृति का...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।