देहसत्ता का रहस्य ( दूसरी क़िस्त)

प्रमीला केपी  प्राध्यापिका, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी, केरल प्रोफेसर . संपर्क :prameelakp2011@gmail.com पढ़ें पहली क़िस्त : देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त) देहलेखन के महत्व को स्त्रीवादियों  ने काफी पहले...

‘डार्क रूम में बंद आदमी’ की निगाह में औरत : पहली क़िस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

पुंसवादी आलोचना के खतरे और महादेवी वर्मा

सुधा सिंह आलोचक सुधा सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं.  ज्ञान का स्त्रीवादी पाठ , स्त्री अस्मिता साहित्य और विचारधारा, आदि कई किताबें...

‘राष्ट्रवादी’ इतिहासकार काशी प्रसाद जायसवाल: एक स्त्रीवादी अवलोकन

रतन लाल  एसोसिएट प्रोफेसर हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 'रोहित के बहाने' सहित 5 किताबें प्रकाशित.संपर्क : 9818426159 राष्ट्रवादी आंदोलन और राष्ट्रवादी इतिहास लेखन के दौर...

हिन्दी नवजागरण और स्त्री

अंजली पटेल ,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. Email : anjalipatelbindki@gmail.com नवजागरणएक कालवाची शब्द है, जहाँ इसकी पृष्ठभूमि विभिन्न आन्दोलनों से जुड़ती है तो वहीं स्त्री उत्थान की...

राष्ट्रीय आंदोलन में महिलायें और गांधीजी की भूमिका पर सवाल

कुसुम त्रिपाठी स्त्रीवादी आलोचक.  एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हैं , जिनमें ' औरत इतिहास रचा है तुमने','  स्त्री संघर्ष  के सौ वर्ष ' आदि चर्चित...

लिव-इन- संबंध एवं जातीय संरचना

विकाश सिंह मौर्य दुनिया भर के मुल्कों के बाशिंदों के लिए इक्कीसवीं सदी की शुरुआत भारी झंझावातों के साथ हुई है. इन झंझावातों की पूर्वपीठिका...

‘विज्ञापनों में महिलाओं का प्रस्तुतीकरण:आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य’

उपासना गौतम पी-एच. डी शोधार्थी,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा. सम्पर्क: sonpari2003@gmail.com प्रस्तावना लिंगाधारित व्यवस्था में खड़ी विभिन्न संस्थाओं  और उसके घटकों ने स्त्री अधीनस्थता का पूरा लाभ...

यथार्थ के आईने में स्त्री (‘एक बटा दो’ उपन्यास के सन्दर्भ में)

मधुमिता ओझा  आज के सन्दर्भ में आज की स्त्री के बाहर और भीतर के संघर्ष को समझने के लिए लेखिका सुजाता का उपन्यास ‘एक बटा...

क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश...

मीना बुद्धिराजाकविता अपनी संरचना और प्रकृति में तमाम भेद-भावों से परे और लिंग,वर्ण,समुदाय, जाति- वर्ग की अवधारणाओं से मुक्त और आज़ाद रहती है ।...
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‘प्रसाद की रचनाओं में स्त्री स्वर की अभिव्यक्ति’

पूनम प्रसाद जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिन्दी साहित्य के गौरान्वित व महान लेखक हैं।जिनके कृतित्व का गौरव अक्षुण है। उनकी प्रतिभा का निरूपण कविता, कहानी, नाटक,...
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